Horror Story In Hindi (Dujod Village)

Horror Story Dujod Village

Horror Story In Hindi
(Dujod Village)

(ये कहानी एक काल्पनिक है। जो लेखक महेश सैनी के द्वारा लिखी गई है।)

Horror Story In Hindi

ये कहानी दूजोद गाँव की है। जो कि आज से 30 साल पहले ये गाँव पूरा खण्डर हो गया था। उस दिन के बाद वहाँ आत्माओं का निवास होने लग गया था। आज तक जो भी उस दूजोद गाँव मे गया है। वो कभी लौट के नही आया।
इस कहानी में एक बड़ी कॉलेज के अमीर लोगो के बच्चे उस गांव में चले जाते हैं।
अब ये देखना है कि उनके साथ क्या होता है। वो लोग जिंदा लौटते हैं। की नही..?

जयपुर शहर :-
सिंघानिया कॉलेज के स्टूडेंट जो इस कहानी के मुख्य किरदार ‘धर्मेंद्र सिंह’ जो कि एक बॉडी बिल्डर है। और दिमाग के तौर पर सबसे बुद्धिमान लड़का।
ओर उसका दोस्त ‘दिप प्रताप सिंह’ जो एक अमीर बाप की औलाद।

‘रिया’ धर्मेंद्र सिंह की प्रेमिका।
ओर एक है बद्री जो सबसे डरपोक व्यक्ति है। बद्री की हर छोटी – छोटी बात पर फट जाती है।

‘राजकुमार’ ये एक आशिक़ है। ये हमेशा गिटार बजाता रहता है।
ओर इन सब में से सबसे खूबसूरत लड़की ‘प्रियंका’ जो कि इसे इतिहासिक चीजो में ज्यादा लगाव है।
ओर इनके ग्रुप का एक ओर लास्ट दोस्त ‘विष्णु’ जो ये हमेशा प्रियंका पर लाइन मारता रहता है।

(इन सातों का ये एक ग्रुप है जिसमे सिर्फ धर्मेंद्र सिंह की चलती है।)

सिंघानिया कॉलेज में प्रियंका की क्लास चल रही होती है। उसमें ये बताया जाता है कि जयपुर से 150 किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है जिसमें भूत-प्रेतों का निवास है। उसमें आज तक जो भी गया है। वो कभी लौट के नही आया।

तो ये बात प्रियंका अपने ग्रुप के मेंबर को बताती है। और उन्हें कहती है कि हम भी वहाँ चलते है।
तो बद्री की फट जाती है ये बात सुन के। तो दिप प्रताप सिंह कहता है कि चल चलते है। इस बार हॉलिडे वहीं बनाएंगे।

ये सातों जने (1) धर्मेंद्र सिंह (2) दिप प्रताप सिंह (3) रिया (4) बद्री (5) राजकुमार (6) प्रियंका (7) विष्णु।
ये दूजोद गाँव के लिए रवाना हो जाते हैं।

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अब इन्हें ये नही पता था कि ये बात सच है कि जो भी दूजोद गाँव गया वो कभी लौट के नही आया।

दूजोद गाँव :-
दूजोद गाँव के अंदर बढ़ते ही दूजोद गाँव का मुख्य द्वार का द्वरपाल ‘शेखर’ वहीं बैठा रहता है। उन्हें रुकवाता है। ओर उन्हें कहता है कि तुम लोग यहाँ से वापिस चले जाओ। यहाँ बाहर से लोगो का आना मना है। तो राजकुमार कहता है कि तेरा काम चौकीदारी करने का है हमे ज्ञान देने का नही।
ओर वो लोग गाड़ी स्टार्ट करके दूजोद गाँव के अंदर चले जाते हैं। जैसे ही गाड़ी गाँव में जाती है। तो गाड़ी की हवा से दूजोद गाँव के बोर्ड से मिट्टी हट जाती है। उसपे खून से लिखा होता है। ‘दूजोद गाँव’।

दूजोद गाँव में जाने के बाद वो लोग रास्ता भटक जाते हैं। तो वहाँ पर एक 21 साल का लड़का ‘महेश’ बैठा रहता है।
तो उन्हें धर्मेंद्र सिंह अपने पास बुलाता है और कहता है कि हमें दूजोद गाँव घूमना है। तुम हमें रास्ता बता सकते हो क्या।
तो महेश कहता है। हम घुमा देंगे गाँव तो। पर चार्ज लगेगा। तो दिप प्रताप सिंह कहता है। चल गाड़ी में बैठ जा।

वो लोग गाँव के अंदर चले जाते हैं। जहाँ पर पुरानी हवेलियां खण्डर की तरह बनी रहती है।
प्रियंका को देखते ही महेश को प्यार हो जाता है। पर विष्णु को बहुत जलन होती है। पर विष्णु कुछ नही कर पाता है।
प्रियंका भी महेश से स्माईल करते हुए बातें करने लग जाती है। और धीरे – धीरे शाम होने लगती है। तो वो लोग वहाँ पर रुक जाते हैं।

बद्री उस जगह से थोड़ी सी दूर साइड में टहलते हुए चला जाता है।
काफी देर हो जाती है पर बद्री वापिस नही लौटता है। तो दिप प्रताप सिंह कहता है। कोई बात नही वो डरपोक है। तो कहीं डर के मारे छुप के बैठ गया होगा।

वो सभी लोग बद्री को ढूंढते हैं। तो बद्री की एक पेड़ से लटकी हुई लाश मिलती है।
अब आता है इन सब में मौत का खोफ, ये सब अब डरने लगते हैं कि यहाँ सच में आत्माओं का निवास है।
ये सभी लोग भागते हुए गाड़ी में बैठते हैं। तो गाड़ी भी खराब हो जाती है। और महेश, प्रियंका का हाथ पकड़ के बैठ जाता है। सबसे ज्यादा महेश ही डरा हुआ है।

ओर फिर ये लोग गाड़ी से उतर के यहाँ से भागते हैं। भागते – भागते एक पुरानी हवेली के पास पहुँच जाते हैं। जहाँ पर ‘कमल’ (उस हवेली का मालिक) लाल टेन लेके खड़ा रहता है।
कमल उन सब की बात सुन के उन सब को अपनी हवेली में शरण दे देता है। वो लोग रात को सो तो जाते हैं। पर उन में मौत का ख़ौफ़ बढ़ जाता है। जिससे उन्हें भूत-प्रेतों के सपने आते हैं।

सुबह होते ही कमल के साथ उस पेड़ के नीचे जाते हैं। जहाँ पर बद्री की लाश लटकी हुई थी।

वहाँ पर पहुँच के देखते हैं। कि बद्री की लाश गायब है। तो वो लोग एक साथ होकर बद्री की लाश को ढूंढते है। पर बद्री की लाश नही मिलती है। ओर शाम हो जाती है।

थोड़ा सा अंधेरा होता है कि तब तक राजकुमार भी गायब हो जाता है। उन सब के अंदर ओर डर बढ़ने लगता है। वो थोड़ी देर इधर – उधर घूमते है। और फिर वो लोग एक शिव के मंदिर के पास पहुँच जाते है। जहाँ पर मंदिर से थोड़ी दूरी पर राजकुमार की कटी हुई लाश मिलती है।

वो सब डरे हुए पसीने से लतपत हैं। ओर तब धर्मेंद्र सिंह दिमाग लगा लेता है कि आत्मा अपन में से एक है। तो धर्मेंद्र सिंह, दिप प्रताप सिंह को अपने पास बुला के उसे बताता है कि आत्मा और कोई नही उस हवेली का मालिक कमल ही है। क्योंकि जब राजकुमार गायब हुआ था। तब कमल अपने पास नही था। और जब हम हवेली में ठहरे थे। तब वहाँ रात को कमल नही था। और उसका पहनावा, ऐसा लगता है की ये वस्त्र हमारे बाप दादाओं के जमाने का है। और तब ही ये मंदिर से काफी दूर खड़ा है।

तब ये बात दिप प्रताप सिंह को समझ आ जाती है और सबसे ज्यादा दिप प्रताप सिंह की फटने लगती है। वो ओर ज्यादा पसीने से लतपत हो जाता है। Horror Story In Hindi
लोग मंदिर से इधर – उधर बैठे रहते हैं। तब धर्मेंद्र सिंह चिला के कहता है। कि सभी लोग मंदिर में आ जाओ।

तभी कमल को समझ आ जाता है। कि उन्हें पता चल गया है कि मैं ही आत्मा हूँ। और उनमें से रिया को कमल पकड़ लेता है। ओर विष्णु मंदिर में कैसे ना कैसे कर के पहुँच जाता है।
पर कमल अपनी जादुई शक्ति से रिया का गला पकड़ के ऊपर उठा देता है। तब धर्मेंद्र सिंह गुस्से में शिव की त्रिशूल निकाल के मंदिर के बाहर आ जाता है।
पर ये बात किसी को नही पता थी कि वो त्रिशूल इंसान के हाथ में है। तब तक वहाँ की आत्माओं की शक्ति सामान्य हो जाती है और वो एक नॉर्मल इंसान की तरह ही लड़ सकते हैं।
पर ये बात कमल को भी नही पता थी कि इस त्रिशूल से हम काबू में आ जाएंगे।

अब कमल ओर धर्मेंद्र की शक्ति सामान्य थी। तो वो दोनों लड़ते हैं और कुछ ही देर में कमल की आत्मा गायब हो जाती है। क्योंकि लड़ाई में धमेंद्र सिंह, कमल के छाती में त्रिशूल चोब देता है। और धर्मेंद्र सिंह, रिया को लेकर मंदिर में चला जाता है।
पर तब तक महेश ओर प्रियंका गायब हो जाते हैं।
धमेंद्र बोलता है कि उन दोनों को ढूंढना होगा। नही तो उन दोनों की भी लाश मिलेगी।
पर दिप प्रताप सिंह कहता है कि हम मंदिर से बाहर निकलेंगे तो आत्मायें हम पर हावी हो जाएगी।

तब धमेंद्र सिंह कहता है कि जब तक शिव की त्रिशूल अपने पास है तब तक आत्माओं की शक्ति सामान्य हो जाती है। जैसे कमल से लड़ा था। वैसे ही सभी आत्माओं से लड़ा जा सकता है।

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ओर वो चारो धमेंद् सिंह, दिप प्रताप सिंह, रिया व विष्णु उन दोनों महेश ओर प्रियंका को ढूंढने चले जाते है। रात का समय है तो विष्णु की सारी आशिक़ी उतर जाती है। और दिप प्रताप सिंह के पीछे छुप जाता है।

महेश ओर प्रियंका को ढूंढते – ढूंढते सुबह हो जाती है। सुबह होते ही एक बड़े से पेड़ के नीचे महेश ओर प्रियंका दोनों बेहोश पड़े मिलते है।

धमेंद्र सिंह उन्हें पूछता है कि तुम यहाँ कैसे। तो प्रियंका कहती है कि पता नही जंगल से कुछ आवाजे आ रही थी। तब वहाँ से भाग के यहाँ सो गए थे।

ओर फिर वो लोग गाँव से बाहर जाने के लिए रास्ता ढूंढते है। रास्ता ढूंढते – ढूंढते शाम हो जाती है। तब रिया को प्यास लगती है। तब दिप प्रताप सिंह, महेश को बोलता है। तुम दोनों जाओ और कहीं से पानी ले आओ।
महेश डरा हुआ होता है। और रिया के साथ पानी लेने दूसरे रास्ते चले जाते हैं।
काफी देर हो जाती है और थोड़ा अंधेरा भी होने लगता है। पर वो दोनों वापिस लौटते नही है।

तब धमेंद्र सिंह को पता चल जाता है कि यहाँ एक नही दो आत्माये है। दूसरी आत्मा महेश ही है। तब प्रियंका कहती है। तुम्हें कैसे पता।
तब धर्मेंद्र सिंह कहता है कि जैसे कमल बैठता था वैसे ही महेश बैठता है।
तब उन सब को याद आती है कि कमल ओर महेश के बैठने का तरीका एक जैसा था।

तब धर्मेंद्र सिंह वहाँ से रिया की तरफ भागते हैं। रात के 10 बज जाते हैं। तब जाकर रिया की लाश मिलती है। और उस लाश के पास कमल ओर महेश दोनों खड़े मिलते हैं।

धमेंद्र को ये बात अच्छे से पता थी कि इस त्रिशूल से एक आत्मा से लड़ा जा सकता है। पर दोनों आत्माओं से एक साथ नही लड़ा जा सकता है।
तभी वो सभी लोग शिव के मंदिर की तरफ भागते हैं। और भागते हुए मंदिर में पहुँच जाते है।
कमल ओर महेश उन सब को इतनी आसानी से नही मार सकते है। क्योंकि शिव की त्रिशूल से उन दोनों की शक्तियां सामान्य हो जाती है।

वो लोग रात को 11 बजे मंदिर में छुप के बैठ जाते हैं। तब प्रियंका का हाथ एक किताब पर लग जाता है।
तब गाँव में जोर से हवाएं चलने लगती है। बिजली भी अपना रुक बदलती है। ऐसा लगता है। जैसे कोई बहुत बड़ा तूफान आने वाला है।

उस किताब में दूजोद गाँव के 35 साल पहले का इतिहास लिखा हुआ होता है कि ये गाँव खण्डर कैसे बना और आत्माओं का निवास क्यों हुआ था।

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Horror Story In Hindi

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कहानी :- लेखक महेश सैनी

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